Top News

गोंडराजे महाराजा खांडक्या बल्लाळशाहराजे आत्राम का अस्थीत्व मिटानेकी पुजारी व्दारा की जारही है‌ साजीश.

गोंडराजे महाराजा खांडक्या बल्लाळशाहराजे आत्राम का अस्थीत्व मिटानेकी पुजारी व्दारा की जारही है‌ साजीश. 


 खांडक्या बल्लाळशाह राजे आत्राम इनके समाधी‌ के भितर ही पुजारीने खोली अपनी दुकान.


राजा की समाधी पर की चैत्र नवरात्र के घट की स्थापना और अन्य भगवानो की मुर्तीया एव प्रतीमाओकी की स्थापना.



( विदर्भ माझा न्युज 24 - संपादक )संजय घुगलोत,   बल्लारशाह :-  बल्लारशाह शहर की स्थापना गोंडराजे  खांडक्या बल्लाळशाह राजे आत्राम इन्होने १३वी सदी मे की थी, और चांदा गड  का निर्मान भी खांडक्या बल्लाळशाह राजेंने कीया था, जिसके नाम से शहर का नाम बल्लारशाह पडा,जिसके राज्य में धन धान्य की कोई कमी नहीं थी..धन धान्य से सभी प्रजा सुखी थी,जिस राजा की वीरता और प्रजा की संपन्न स्थिती को देखकर अन्य राजाओं को इर्षा एवंम् जलन होती थी..वह राजा कोई ओर नहीं बल्की हमारे गोंडवाना साम्राज्य के महान सपूत महाप्रतापी खांडक्या बल्लाळशाह आत्राम गोंड राजे थे|



विश्व पराक्रमी महाराजा खांडक्या बल्लाळशाह राजे, खांडक्या बल्लाळशाह राजे इंनकी धर्म पत्नी राणी हिताराणी एव चांदा गोंडराज्य के अंतीम राजे निलकंढशाहराजे आत्राम  इनका समाधी स्थल बल्लारशाह बस स्थानक से करीब 3 की.मी.बामनी मार्ग पर कपुर पेट्रोलपंप के पीछे है, प्रशासन के नजर अंदाज करणे से समाधी की अवस्था बिकट होती जा रही है, समाधी उद्धस्थ होने की कंगार पे है.! 


ऐसे मे एक पुजारी ने समाधी स्थल का अस्थीत्व मिटाने का कार्य शूरू कीया है, लोगों से समाधी की पहचान छुपाकर वह इस समाधी स्थल‌ पे कुच भगवानों‌ की मुर्तीया एव‌ प्रतीमालाएं लगाकर अपनी दुकानदारी चला रहा है,


और प्रशासन इस और नजर अंदाज कर रही है, इतना ही नही तो इस पुजारी ने समाधी स्थल के भितर ही चैत्र नवरात्र के घट की स्थापना भी की है,

पुजारी का नाम पुजारीने चंद्रमा प्रसाद मिश्रा बताया है,

  और सुत्रो से मिली जानकारी के मुताबीक ये  पुजारी चंद्रमा प्रसाद मिश्रा साल भर आने वाले हींदु देवी देवताओं के तेव्हार एक गोंडराजा की समाधी पे मना रहा है,तैव्हारो के नाम पर  कर लंगर के नाम पर ये  चंदा काट  रहा है,जिस से राजे खांडक्या बल्लाळशाह आत्राम इनका का अस्थीत्व मिटाने की साजीश‌ इस पुजारी चंद्रमा प्रसाद मिश्रा की और से की जा रही है,ये नाकारा नही जा सकता.।

प्रशासन एव पुरातन विभाग ने इस और ध्यान देनेकी अत्यंत आवशक्ता है पुरातन विभाग के नजर अंदाज से ही समाधीकी दुरवस्था हो रही है.


गौंडराजाऔंके ही समाधी की  दुरवस्था क्यु ?सरकार - प्रशासन इस और क्यु नही देती ध्यान ऐसेभि कई सवाल उटते है.


Previous Post Next Post