बल्हारशाह में जननायक विर बिरसा मुंडा इनके पुतले के पास के परीसर में बंडती गंदगी का साम्राज्य.....संबंधीत विभाग की अनदेखी.....
बडती गंदगी से विर बिरसा मुंडा पुतले की और नमन: करणे जाने वाले नागरीकोंको करणा पडता है कयी समस्यांओंका सामना - प्रितम पाटील,अध्यक्ष - संघमीत्र चौक मीत्र परीवार
बिरसा मुंडा पुतले की और जाने वाली कच्ची सडक का तुरंत निर्मान कर पक्की सडक बनाने की नागरीकोंने की थी मांग.....प्रशासनकी चुप्पी......
विदर्भ माझा न्युज 24 - बल्हारशाह
बिरसा मुंडा आदिवासी समाज के ऐसे नायक रहे, जिनको जनजातीय लोग आज भी गर्व से याद करते हैं. आदिवासियों के हितों के लिए संघर्ष करने वाले बिरसा मुंडा ने तब के ब्रिटिश शासन से भी लोहा लिया था.
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उनके योगदान के चलते ही उनकी तस्वीर भारतीय संसद के संग्रहालय में लगी हुई है. ये सम्मान जनजातीय समुदाय में केवल बिरसा मुंडा को ही अब तक मिल सका है. बिरसा मुंडा का जन्म झारखंड के खूंटी ज़िले में हुआ था.
उनके जन्म के साल और तिथि को लेकर अलग-अलग जानकारी उपलब्ध है, लेकिन कई जगहों पर उनकी जन्म तिथि 15 नवंबर, 1875 का उल्लेख है,
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बल्हारशाह शहर के टेकडी विभाग अंतर्गत बिरसा मुंडा का पुतला है, हर साल आदिवासी समुदाय एव विवीध जाती धर्म के लोग बिरसा मूंडा के जयंती एव पुन्यतीथी पर वहा इकठा होते है, किंतू वनविभाग व्दारा बनाई गयी लंबी सुरक्षा दिवार के उस पार बिरसा मुंडा का पुतला करीब 200 300 मिटर भितर है, वहा जाने के लिए प्रशासन ने अब तक पक्की सडक बनाई नही ईससे वहा जाने वाले नागरीकोंको कई समस्यांओंका सामना करणा पडता है,
बगे बडे बाबुल के कांटे वाले पेडोंसे गुजरना पडता है, और तो और वीर बिरसा मुंडा के पुतले के पास जाते वक्त दुर्गंधी का भी सामना करणा पडता है, ये समस्या कई सालोसे चल रही है लेकीन संबंधीत प्रशासन इस और नजर अंदाज करता आ रती है, कटे हुवे मुर्गीयोंका वेस्ट दिवार की उस और फेक दिया जाता है, ठेर सारे कचरे के ठीग दिवार के उस और पडे हुवे है इस और प्रशासन नजर अंदाज करती हुवी चुपी रखी बैठी है, प्रशासन के अनदेखी से एक क्रांतीकारी का पुतला दुर्गंधी और गंदगी के घेरे में आगया है,विर बिरसा मुंडा ईनके पुतले के पास नमन करणे जाने वाले नागरीकोंको अनेक समस्याओंका सामना करते हुवे जाना पडता है,
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एक महान आदिवासी जननायक विर बिरसा मुंडा का पुतला दुर्गंधी भरे परीसर में है, इस और प्रशासन ने ध्यान देने की जरूरत थी मात्र जब तक कोई ज्ञापन देंगा नही या आंदोलन करेंगा नही तब तक प्रशासन को जाग आती नही.
क्या स्वयम ही महापुरूषोके पुतले एव क्रांतीकारीयोंके पुतले स्वच्छ करणा,उनके आस पास का परीसर स्वच्छ रखना ये प्रशासन का काम नही ? प्रशासन की कीस चिछ की रहा देखती है ? नागरीक आवाज उठायेंगे तब ही प्रशासन कामपे लगेंगी ? या प्रशासन का स्वयंम नागरीकोंकी समस्या हल करणे का कोई कर्तव्य नही? ऐसे कयी सवाल संघमीत्र चौक मीत्र परीवार के अध्यक्ष प्रितम पाटील इन्होने खडे कीये.....
स्वच्छ भारत अभीयन अंतर्गत अवार्ड प्राप्त करणे वाली बल्हारशाह नगरपालीका भी ईस और कभी ध्यान देती नजर नही आयी.....अगर प्रशासन इस और ध्यान नही देंगा तो विर बिरसा मुंडा इनका पुतले का परीसर जंगल बनकर लुप्त हो जायेंगा....प्रशान एव संबंधीत विभाग ने इस और ध्यान देणेकी जरुरत......




