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क्या जागेंगी बल्लारशाह की स्थानीय प्रशासन निंदसे..?

 क्या जागेंगी बल्लारशाह की स्थानीय प्रशासन निंदसे..?


शहर के संस्थापक के ही मखबरेकी दुरदशा और नगर परीषद लेती है स्वच्छता के अवार्ड.


मुनगंटीवार ने समाधी और कील्ले को कीया है नजर अंदाज 


शहर की ऐतीहासीक धरोहरोंकी और कब देंगी प्रशासण ध्यान.




 ( विदर्भ माझा न्युज 24 ):-   विदर्भ का इतिहास काफी हद तक मिटा दिया गया है, विदर्भ के इतिहास पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है, यहां तक ​​कि एक एकजुट महाराष्ट्र में रहते हुए, विदर्भ को विदर्भ के अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है,

 विदर्भ का इतिहास महाभारत काल से मिलता है, 


बल्लारशाह और चंदा गाड की गोंडराजे खांडक्या बल्लाळशाहराजे आत्राम इन्होने स्थापना की थी,

विश्वपराक्रमी महाराजा खांडक्या बल्लाळशाहराजे आत्राम समाधी

बल्लारशाह शहर के बामनी मार्ग पर कपूर पेट्रोल पंप के पीछे है विश्व पराक्रमी महाराजा खांडक्य बल्लशाह राजे आत्राम,राणी हीतारानी बल्लाळशाहराजे आत्राम एव चांदा गोंडराज्य के अंतीम शासक राजे निलकंठशाह आत्राम की समाधी स्थल है, 

हीतारानी बल्लाळशाहराजे आत्राम समाधी.

 यह शर्म की बात है कि प्राचीन विभाग ने इन ऐतिहासिक मकबरे का दखल भी नहीं लि और इस और ध्यान भि केंद्रीत नही कीया है। 

बल्लारशाह शहर में स्थानीय प्रशासन भी इस समाधि की और पीठ दीखाकर बैठा है। 

चांदा गोंडराज्य के अंतीम शासक राजे निलकंठशाह आत्राम.

 हाल ही में, एक पुजारी ने समाधि के भितर ही चैत्र नवरात्र का घट बिढाया और समाधी को मंदीर का रूप देणेका प्रयास कर रहा था,


लेकिन जैसे ही विदर्भ मेझा न्यूज 24(Www.vidarbhmazanews24.in) ने उसकी पोल खोली और खबर को वाईरल कर दीया, पुजारी ने 9 वें दिन ही चैत्र नवरात्र का घट समाधी के भितरसे उठालीया और समाधि स्थल से रफुचक्कर हो गया।


 हालांकि, जब शहर का इतीहास लुप्त हो रहा है, तब भी स्थानीय प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है। और साथही साथ बल्लारशाह  विभासभा शेत्र के विधवान आमदार विकास पुरुष सुधीर मुनगंटीवार इन्होने विधानसभा शेत्र मे कई विकास काम कीये है मात्र क्या उन्हे भि इस ऐतीहासीक स्थल की याद नाही आई या उन्होने इस ऐतीहासीक स्थल को नजर अंदाज कीया ?


शेत्र के आझी माझी मंत्री,आमदार,खासदार,प्रशासन के नजर अंदाज से शहर का ऐतीहासीक धरोहर नामशेछ होनेकी कगार पर है,यह एक वास्तवीक शर्म की बात है.

बल्लारशाह विधानसभा के विदमान विकास पुरुष आमदार सुधीर मुनगंटीवार ने अनगीनत विकास काम कीये मात्र एक भि जगह को ‌उन्होने शहर के संस्थापक आत्राम राजे का‌ नाम नही दीया,नाही कभी उन्होने कील्ले और समाधी स्थल को भेंट दी है.सभी विकास कामो को‌ ध्यान मे‌ लेते हुवे ये नजर आता है की मुनगंटीवार ने समाधी और कील्ले को नजर अंदाज कीया है. अब सवाल ये है की क्यु उन्होने समाधी को कील्ले को शहर के वैभवशाली इतीहास को नजर अंदाज कीया है?

 



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