! ! ए खुदा के बन्दे ! !
"कवि" बाबू भंडारी."हमनवा" बल्लारशाह
मो..नं..7350995551...
( विदर्भ माझा न्युज 24 मुख्य संपादक ) :-
अरे भाई क्यों रोता हैं ?
अपने दिल का दुखड़ा क्यों सुनाता हैं ?
हाथ पैर तेरे हैं सही सलामत।
क्यों करता हैं ऐसी करामात ?
ऐसा क्या हैं जो तू नहीं कर पाएगा...
जज़्बात हो तेरे बुलंद तो...
फलक-ए-जमी को भी एक कर जाएगा।
जागती आंखों से जो देखे हैं सपने तूने।
आज नहीं तो कल वो होंगे तेरे अपने।
जूट जा तू एक पल गंवाए बिना।
हर मुश्किलों का तू डट के कर सामना।
ए खुदा के बन्दे...
मशक्कत-ए-कोशिश तेरी रंग लाएगी।
सोचा नहीं होगा...
ऐसी ज़िन्दगी तेरी संवर जाएगी।
लेकिन एक पल के लिए...
दिल की धडकन यहां थम जाती हैं।
पता नहीं इस तन से...
रूठकर कब जान जाने वाली हैं ?
ए बन्दे जो हैं तेरे पास वो सब यहीं पर रह जाएगा।
"बाबू" तेरे मशक्कत से...
तूने जो नाम कमाया हैं वही तो साथ ले जाएगा।
"कवि"🙏 बाबू ✍️ भंडारी. "हमनवा" बल्लारशाह
मो..नं..7350995551...
