महुआ के चमत्कारी फायदे सुनकर हैरान हो जायोंगे आप.
अनेक बिमारीयोका रामबान इलाज है महुआ.
महुआ का पेड़ आदिवासियों के लिए है बहुत महत्वपुर्ण .
(विदर्भ माझा न्युज 24 - मुख्य संपादक) :- आज विदर्भ माझा न्युज 24 आपके लिए लेकर आए हैं महुआ के फायदे. महुआ का पेड़ आदिवासियों के लिए बहुत महत्व रखता है. आदिवासी लोग न सिर्फ खाने के लिए बल्कि ईंधन के रूप में भी महुआ का उपयोग करते हैं. क्या आपने कभी महुआ का नाम सुना है, अगर नहीं तो आज इस लेख में हम आपको महुआ के फायदों और नुकसान के बारे में बताने जा रहे हैं, क्योंकि महुआ खाने में जितना टेस्टी होता है, उतना ही ये सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है.
महुआ की खासियत.
महुआ की छाल का इस्तेमाल क्रोनिक ब्रोंकाइटिस, डायबिटीज मेलिटस और ब्लीडिंग में किया जाता है. गठिया और बवासीर की दवाई के रूप में महुआ की पत्तियों का इस्तेमाल किया जाता है. इसकी जड़ सूजन, दस्त और बुखार में बहुत असरकारक होती है. खास बात ये हैं महुआ बहुत लंबे समय तक सुखा कर स्टोर किया जा सकता है. एक बार जब ये सूख जाता है तो सालों तक इसका प्रयोग किया जा सकता है.
महुआ में क्या पाया जाता है.
महुआ में कार्बोहाइड्रेट, फैट, और प्रोटीन के साथ ही कैल्शियम, फास्फोरस आयरन, कैरोटीन और विटामिन सी भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है. इतने पोषक तत्वों से भरे होने के कारण इसे खाने के बहुत से फायदे होते हैं.
गठिया में पीएं छाल का रस और
करें तेल की मलिश.
बहुत लोग गठिया की बीमारी की वजह से परेशान रहते हैं. न अच्छे से चल पाते हैं और न ही कोई काम कर पाते हैं. ऐसे में महुआ की छाल गठिया के इलाज में बहुत कारगर है. महुआ की छाल को आप उबाल कर उसका जूस पींए. ये गठिया के दर्द को ही नहीं बल्कि अंदर आ गई सूजन और जकड़न को भी कम करता है. साथ ही महूआ के फूल, जड़ और छाल के साथ बीजों को पीस कर सरसों के तेल में पका लें और इसकी मालिश जोड़ों पर करें. इससे जल्द ही आराम मिल सकता है.
दांत दर्द होगा गायब.
अगर आपको दांतों में दर्द है या फिर टॉन्सिलिटिस की समस्या है तो आप महुआ की छाल का इस्तेमाल कर सकते हैं. आपको पहले महुआ की छाल को पीसना होगा, फिर उमसें पानी मिला लें. इस पानी से आप कुल्ला करें और रस को दांतों और मसूड़ों पर लगा लें. इससे आपको काफी आराम मिलेगा.
जुकाम की समस्या से निजात.
महुआ का सेवन करने से जुकाम और कफ की समस्या से राहत मिलती है. जिन लोगों को ब्रोंकाइटिस या फेफड़ों में कफ जमने की दिक्कत हो वह महुआ की छाल का काढ़ा जरूर पीएं. साथ ही महुए को किसी न किसी रूप में आहार में शामिल करें. ऐसा करने पर इस तरह की समस्याओं से जल्द ही निजात पा सकते हैं.
पेट के कीड़े मारने में मददगार.
महुआ का सेवन पेट के कीड़ों को मारने में मददगार होता है. बच्चों को अक्सर पेट में कीड़े हो जाते हैं. ऐसे में उन्हें महुए की छाल का काढ़ा दें और महुए की रोटी खिलाएं तो कीड़े मर जाते हैं. इसके अलावा दस्त या अपच होने पर मुहआ की छाल का रस पीएं, इससे आराम मिलता है.
डायबिटीज में होता है 'अमृत'.
डायबिटीज मरीजों के लिए महुआ अमृत से कम नहीं है. डायबिटीज बीमारी के खिलाफ महुए की छाल अमृत की तरह काम करती है. हालांकि महुआ के फूल का प्रयोग डायबिटीज रोगियों को नहीं करना चाहिए.
महुआ से बनती है शराब.
महुआ से देसी शराब बनाई जाती है. महुआ का फल जब पेड़ से पूरी तरह से पक कर गिरता है. उसके बाद इस फल को पूरी तरह से सुखाया जाता है. इसके बाद सभी फलों को बर्तन में पानी में मिलाकर कुछ दिन तक भिगोकर रखा जाता है. उसके बाद उस बर्तन को आग पर गरम किया जाता है और गरम होने पर जो भाप निकलती है उसको पाइप के द्वारा दूसरे बर्तन में इकट्ठा किया जाता है. भाप ठंडी होने पर लिक्विड फॉर्म में जो मिलता है वह शराब होती है. कहा जाता है कि अगर कच्ची शराब का सेवन दवाई के रूप में किया जाते तो शरीर को लाभ होता है, जबकि इसका अधिक सेवन करना शरीर को बेकार भी कर सकता है..
पुरुषों की सेक्स संबंधी समस्याओं में
काम आते हैं फूल
महुआ के फूल काफी पौष्टिक होते हैं और सामान्य टॉनिक के रूप में लिए जा सकते हैं। इसके लिए सूखे फूल के पाउडर को घी और शहद के साथ खाया जाता है। सिरदर्द, आंखों की जलन जैसी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए महुआ के फूलों के ताजे रस को नाक में डालने से फायदा मिलता है। नसों की कमजोरी और न्यूरो मस्कुलर सिस्टम की बीमारियों में भी महुआ काफी फायदेमंद है।
इसके लिए महुआ के सूखे फूलों को दूध में उबाल लें। फिर एक बार में 30 से 50 मिली. का सेवन करें।हाइपरटेंशन, हिचकी और सूखी खांसी के इलाज के लिए महुआ के फूलों का ताजा रस काफी कारगर है। महुआ पुरुषों की सेक्स संबंधी समस्याओं के इलाज के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। जिन पुरुषों को कम स्पर्म काउंट या शीघ्रपतन की शिकायत हो, उन्हें दूध में उबाले हुए महुआ के फूलों के शक्करपारे बनाकर खाने की सलाह दी जाती है।
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गठिया, सिरदर्द से लेकर बवासीर में
फायदेमंद हैं बीज
इसके बीज में एक बड़ी मात्रा में तेल और प्रोटीन होता है। महुआ के बीज से मिलने वाले फैट में औषधीय गुण होते हैं। इसके पौधे के बीजों के तेल से त्वचा रोगों और शरीर के दर्द में मालिश की जाती है। साथ ही इसका इस्तेमाल त्वचा रोग, गठिया, सिरदर्द, रेचक और बवासीर में भी किया जाता है।
घाव से लेकर डायरिया में आजमाएं
छाल से तैयार काढ़ा
महुआ में एंटी-माइक्रोबियल गुण इंफेक्शन से निजात दिलाने में मदद करता है। आंत से जुड़ी बीमारियों और डायरिया में इसके पेड़ की छाल से तैयार काढ़ा आराम पहुंचाता है। मसूड़ों में हल्की सूजन और खून आने पर महुआ की छाल के अर्क में पानी मिलाकर लिया जाता है। छाल के अर्क के साथ गरारे करना टॉन्सिलिटिस और फेरेनजाइटिस में भी कारगर है। डायरिया को ठीक करने के लिए एक कप छाल का सत्व आराम पहुंचाता है। इसकी छाल में टैनिन नाम का कैमिकल घाव को सुखाने में मदद करता है।


