राजे केशवशाह एव मोकाशी कीशन कोटनाक इनके नेतृत्वमे महाराष्ट्र तेलंगाना सीमा पर चक्का जाम आंदोलन.
आदिवासी समाज और विदर्भ प्रेमी उतरे रास्ते पर.
३० मीनीट तक महाराष्ट्र - तेलंगाना बाॅर्डर रही बंद.
ईस निर्णय का विरोध पुरे विदर्भ में सारे आदिवासी समाज की तरफ से किया जा रहा है, महाराष्ट्र की पुर्व भाजप सरकार ने इस उद्यान को गोंडवाना उद्यान नाम देणेका निर्णय लिया था, पर जिस तरह महाराष्ट्र कि ठाकरे सरकार ने पहले समृद्धी महामार्ग का नाम बदल कर बाळासाहेब ठाकरे महामार्ग किया था उसी तरह सभी तरफ से हो रहे विरोध के विपरीत जाकर गोडेवाडा आंतराष्टीय प्रानी संग्राहलय का नाम बदल कर बाळासाहेब ठाकरे प्राणि संग्रहालय करणे का मन बना लिया था.
इस निर्णय का तिव्र निषेध करते हुऐ गनतंत्र दिनपर गौंड और महाराष्ट्र तेलंगाना सिमा पर गोंडराजे खांडक्या बल्लाळशाह राजे इनके १५ वे वंशज एव मोकाशि किष्णराव कोटनाक ईनके नेतृत्व मे और केशवशाहराजे ईनके सेनापती पराग गुंडेवार तथा गोंडवाना गनतंत्र पार्टी के चंद्रपुर जिल्हा उपाध्यक्ष अब्दुल हमीद अब्दुल जमीर , ईनकी प्रमुख उपस्थीती में चक्का जाम आंदोलन कीया गया. आंदोलन की सुरूवात जय गौंडवाना व, जय विदर्भ, अलग विदर्भ के नारो से कि गई, इस वक्त उपस्थित सैकडों आदिवासी समाज और तेलंगाना से आऐ हुऐ सभी विदर्भ प्रेमीयो कि और से धिरे धीरे तेलंगाना - महाराष्ट्र बाॅर्डर को बंद कर दिया गया.
तकरीबन ३०मि. तक यह चक्का जाम आंदोलन किया गया, इस वक्त उपस्थित फकरू कोटनाकजी, राजू वेळमे, संजय घुगलोत, गौतम कांबळे, रोहित लोनारे, संदिप केशकर, अविनाश गायकवाड, राकेश बहुरीया, सागर येरगुल्लावार, निखील बहुरीया, सिताराम मडावी,भारत मंगम, यादवराव पेंदुर, जगन्नाथ जुमनाके, साथ हि साथ असंख्य आदिवासी समाज, गोंड समाज और विदर्भ प्रेमी उपस्थित थे.
