बल्हारशाह न्यायालय का बडा फैसला.....
लड़का और बहु को बुजुर्ग माता पिता का घर करणा पडेंगा खाली....
माँ को ४००० रुपये प्रति माह गुजरा भत्ता और सरंक्षण भी होंगा देना....
विदर्भ माझा न्युज 24 - बल्हारशाह
घरेलु हिंसा से सरंक्षण और भरण पोषण निवासी आदेश देने के लिए लाया गया घरेलु हिंसा से महिला सरंक्षण अधिनियम २००५ कानून बुजुर्ग माता के साथ दुर्व्यवहार करने वाले परिजनों के लिए सबक सीखने वाला है.
इसका एक उदहारण पंडित दिनदयाल वार्ड बल्हारशाह के जानकीदेवी लक्ष्मण मांझी का है जिसमे एक बुजुर्ग दंपत्ति ने इस कानून के तहत साथ रह रहे लड़का और बहु पर मानसिक और शारीरिक रूप से सताने और प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए अपने घर से बाहर निकालने की मांग बल्हारशाह न्यायालय से की थी.
बल्हारशाह न्यायालय के न्यायाधीश अनुपम एस शर्मा ने संज्ञान लेते हुए बहु मिना जीतेन्द्र मांझी और लड़का जीतेन्द्र लक्ष्मण मांझी को घर खाली करने के साथ साथ लड़का और बहु कभी दुबारा बुजुर्ग माता पिता के घर में प्रवेश नहीं कर पाने का भी आदेश दिया.
अपने आदेश में न्यायालय ने बुजुर्ग माता पिता को लड़का और बहु से बुजुर्ग दांपत्ति को सरंक्षण का आदेश देने के साथ लड़का जितेंद्र लक्ष्मण मांझी अपनी मा को प्रति माह ४००० रुपये गुजारा भत्ता भी देने का निर्देश दिया.
अपने आदेश में बल्हारशाह न्यायालय ने दो महीने के अंदर बहु और लड़के को बुजुर्ग माता पिता का घर खाली करने का निर्देश दिया और लड़का और बहु बुजुर्ग माता पिता के जिंदगी में दखल नहीं देंगे.
इस आदेश के बाद बहु मिना जीतेन्द्र मांझी और लड़का जीतेन्द्र लक्ष्मण मांझी अपने बुजुर्ग माता पिता का घर खाली करना पड़ेगा. यह आदेश बल्हारशाह न्यायालय के न्यायाधीश अनुपम एस. शर्मा न्यायदंडाधिकारी प्रथम श्रेणी बल्हारशाह ने दिनांक ३१/०८/२०२३ को सुनाया.
लक्ष्मण मांझी बल्हारशाह पेपर मिल से सेवानिवृत्त के उपरांत पंडित दिनदयाल वार्ड, बल्हारशाह में घर खरेदी कर अपने लड़के और बहु के साथ रह रहे थे. उनकी पत्नी जानकीदेवी लक्ष्मण मांझी ने घरेलु हिंसा से महिला सरंक्षण अधिनियम के कलम १९ के तहत बल्हारशाह न्यायलय के समक्ष अधिवक्ता सुनील पुरी के माध्यम से अर्जी देकर लड़का जितेंद्र मांझी और मिना मांझी पर सताने और प्रताड़ित करने का आरोप लगते हुए उसे बाहर निकलने का आग्रह किया था.
बल्हारशाह न्यायालय के न्यायाधीश अनुपम एस. शर्मा न्यायदंडाधिकारी प्रथम श्रेणी बल्हारशाह ने अर्जी स्वीकार करते हुए २ महीने में लड़का और बहु को घर खाली करने का आदेश दिया. बुजुर्ग माता पिता जानकीदेवी लक्ष्मण मांझी और लक्ष्मण बनारसी मांझी की तरफ से अधिवक्ता सुनील पुरी ने पैरवी की.
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