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#ढोल

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आदिवासियों के आराध्य पेन (ईस्ट देव) पहांदी पारी कूपर लिंगो के 18 वाद्ययंत्रों में से एक- ढोल...



( विदर्भ माझा न्युज 24 ) :- 

  आदिवासियों के आराध्य पेन (ईस्ट देव) पहांदी पारी कूपर लिंगो के 18 वाद्ययंत्रों में से एक- ढोल...
जिसे सिर्फ पेन (देव) काम पर ही लयोरो(लड़को) द्वारा बजाया जाता है जैसे पेन जत्रा ,कर्रसाड़, पोहचानी, मरनी (शोक) काम |इसके आवाज से पूरा आस-पास का छेत्र गूंज उठता है तथा इनके ही आवाज पर पेन (देव) नाचते है | यह लकड़ी और चमड़े का बना हुआ रहता है जिसको आपस में वनस्पत्तिक बेल से सिला और जोड़ा जाता है|

वहीं इसके साथ लया (लड़किया)और औरते जात्रा पाटा(जात्रा पे) गाते हुए रेला नाचती है |

आदिवासियों की संस्कृति जितनी जानी जाए कम है क्योंकि वे प्रकृति को मानते है और प्रकृति को भी जितना जानने की कोसिस करे वो और बढ़ती ही जाती है |


 लेखीका :- वर्षा नुरुटी








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