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बीजा पंडुम/अक्ति पंडुम__🌾फसल बुवाई शुभारंम्भ के पावन परब पर आखा (अक्ति)🌳🍀🌿

 बीजा पंडुम/अक्ति पंडुम__🌾फसल बुवाई शुभारंम्भ के पावन परब पर आखा (अक्ति)🌳🍀🌿




( विदर्भ माझा न्युज 24 ) :- 

 प्राकृतिक पर्व (पंडुम), बीजा पंडुम ,जो मूलवासियो के लिए एक बड़ा त्यौहार है | प्रकृति(पुरूड) में होते बदलाव पर, उनका प्रकृति को सेवा देना अत्यत शोभनीय है अतः उनका हर एक तीज-त्यौहार प्रकृति के जुड़ा होता है |

धरती में बीजो(पडेम) को बोने से लेकर फसल के हो जाने तक, प्रकृति से प्राप्त की गेई चीजों को सबसे पहले प्रकृति (पेड़-पौधे, जिव-जंतु) को चढ़ाना और सेवा देना ये मूलवासियो का नियम ही नहीं एक सम्मान भी प्रदर्शित करता है प्रकृति के प्रति|

         इस त्यौहार पर गुड्डे-गुडिया की शादी करना छत्तीसगढ़ के ग्रामीण छेत्रो में काफी प्रसिद्ध है | खेल-खेल में नई पीढ़ी को ज्ञान देने का अद्भुत त्योहार है अक्ति | इसी दिन कुछ विशेष जनजातियों में अपने पूर्वजो(मर चुके) को अपने पेन (देव) में मिलाने की भी प्रथा है |

आदिवासी छेत्र के गांवो में आज के दिन  गांव के प्रमुख पेन(देवी-देव )और सेवा दार लोग गाओं को बांधते (सभी केन्ना- राव की सेवा)है गॉव की सुरक्षा पेनो(देवताओ) द्वारा सुनिश्चित करते है अतः ये व्यवस्था एक गावो के संतुलन और प्राकृतिक सेवा का प्रतिक है |🌿🍀🍂

              

बीजा_पंडुम अक्ति_पंडुम_उत्सव_या_ संजोरी_बिदरी  की

   आप सबो झन ला गाड़ा-गाड़ा बधाई एवं शुभकामनाएं 🙏.                      

लेखीका :- वर्षा नुरुटी


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