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This is the story of a brave revolutionary from Chandagarh.......

यह कहानी है चांदागड के एक विर क्रांतीकारी की.......


विर‌ बाबुराव शेडमाके जयंती दिवस पर समस्त चांदागड वासी तथा विदर्भवासी एव‌ देश वासीयोंको हार्दीक शुभकामनाए......




विदर्भ माझा न्युज 24 - चंद्रपूर (चांदागड)

 यह ज़िन्दा इतिहास है शौर्य, पराक्रम और अपनी मिट्टी के लिए जान तक न्यौछावर करने वाले एक आदिवासी योद्धा की.. गोँडवाना के उस शूरवीर की, जिसने देशी ब्राह्मणी व्यवस्था के साथ मिलकर यहां अपनी हुकूमत चलाने वाले अंग्रेज़ों के आगे कभी अपनी हार नहीं मानी और उनसे लोहा लेते रहे. #vidarbhmazanews24


यह गौरवशाली बयान है उस मूलनिवासी शूरवीर का, जिसने अपनी धरती की आन-बान-शान को सबसे आगे रखा और खुद शहीद होकर भी गोंडवाना के मान को ऊंचा उठाया....यह हक़ीक़त है- गोंड क्रांतीवीर बाबूराव पुलेश्वर शेडमाके की, जिन्हें 21 अक्टूबर, 1858 को अपने स्वाभिमान को बरकरार रखने के चलते अंग्रेज़ों ने फांसी पर लटका दिया था.....सवर्ण इतिहासकारों ने इस महान घटना को दर्ज़ नहीं किया, लेकिन यह एक जींन्दा इतिहास है, जो हमेशा मौजूद रहेगा. #vidarbhmazanews24

बाबूराव पुलेश्वर शेडमाके  का जन्म 12 मार्च 1833 को हुआ था. वह पेल्लेसुर बापू और जुर्जा कुंवर के बड़े बेटे थे. पेल्लेसुर बापू विदर्भ के चांदा जिले के अंतर्गत आने वाले घोट के मोलमपल्ली के बड़े जमींदार थे.


 गोंड परंपरा के अनुसार शेडमाके की शुरूआती शिक्षा घोटुल संस्कार केंद्र से हुई, जहां उन्होंने हिंदी, गोंडी और तेलुग के साथ-साथ संगीत और नृत्य भी सीखा. #vidarbhmazanews24

इंग्लीश सीखने के लिए उनके पिता ने उन्हें छ्त्तीसगढ़ के रायपुर भेजा. रायपुर से शिक्षा प्राप्त करने के बाद बाबुराव शेडमाके वापसी मोलमपल्ली आए. 18 वर्ष की उम्र में उन्होंने आदिवासी परंपरा के अनुरूप राज कुंवर से विवाह किया. #vidarbhmazanews24


1854 में, चांदागड ब्रिटिश रूल के अंतर्गत आया. बाबुराव शेडमाके ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ आवाज उठाई. उन्होंने ब्रिटिशों के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध की रणनीति अपनाई. 1857 के दौरान, जब पूरा भारत में स्वतंत्रता के लिए ब्रिटिश शासन के खिलाफ युद्ध छेड़ा उसी वक्त बाबुराव शेडमाके ने 500 आदिवासी युवाओं को इकट्टा कर जंगोम सेना बनाई और उन्हें लड़ने के लिए तैयार किया. #vidarbhmazanews24


उन्होंने आदिवासी सेना के साथ मिलकर राजगड क्षेत्र को ब्रिटिशों से छुड़वाकर अपना कब्जा जमाया. जब यह खबर चांदागड पहुंची तो ब्रिटिश कलेक्टर मि. क्रिक्टन ने ब्रिटिश सेना को युद्ध के लिए भेजा, लेकिन वहां पहुंचने से पहले ही नांदगाव घोसरी के पास ब्रिटिश सेना को बाबुराव‌ शेडमाके और उनके सैनीकोने युद्ध में हरा दिया. #vidarbhmazanews24

मि. क्रिक्टन ने फिर से सैन्य दल युद्ध के लिए भेजा जोकि संगनापुर और बामनपेट में युद्ध हुआ लेकिन यहांपर भी ब्रिटिश सेना फीर एक बार बाबुराव‌ शेडमाके से हार गई. #vidarbhmazanews24

इन दोनों जीत से बाबुराव शेडमाके का मनोबल और जादा बढ़गया और उन्होंने 29 अप्रैल 1858 को चिंचगुडा स्थित ब्रिटीश सेनाके टेलीफोन शिविर पर आक्रमण कर दिया. 

इस आक्रमण में टेलीग्राफ ओपरेटर्स मि.हॉल और मि.गार्टलैंड मारे गए थे जबकि मि.पीटर वहां से भागने में कामयाब रहा और उसने पूरी घटना की जानकारी चांदागड पोहचकर मि.क्रिक्टन को बताई. #vidarbhmazanews24

मि. क्रिक्टन ने बाबुराव शेडमाके को गिरफ्तार करने के लिए कूटनीतिक चाल चली. एक तरफ वह नागपुर के कैप्टेन शेक्सपियर्स से उन्हे पकड़ने के लिए पूछ रहे थे और दूसरी तरफ वह अहेरी की जमींदारनी रानी लक्ष्मीबाई से बाबुराव शेडमाके को पकड़ने का दवाब बना रहे थे. 


बाबुराव शेडमाके इससे वाकिफ नहीं थे. बाबुराव‌ शेडमाके अपनी बुवा राणी लक्ष्मी बाई के यहा लक्ष्मी बाईके बुलावे से खाना‌ खाने उनके घर पोहचे इस बात की जानकारी लक्ष्मीबाई ने मि. क्रिक्टन को देदी क्रिक्टन ने अपनी सैना समेत राणी लक्ष्मीबाई के घर को घेर‌ लीया और खाना खाते वक्त

18 सितंबर 1858 को बाबुराव शेडमाके को गिरफ्तार कर लिया गया. #vidarbhmazanews24


उन्हें चांदा सेंट्रल जेल लाया गया, 21 अक्टूंबर 1858 को बाबूराव पेल्लेसुर शेडमाके को चांदा जेल‌ के परीसर में खुले मैदान में पीपल के पेड पर फांसी दे दी गई. #vidarbhmazanews24

इतीहास कारोंका कहना है की जब बाबुराव‌ शेडमाके को राणी लक्ष्मीबाई के घर पर पकडने ब्रिटीश सेना गयी थी तब खाना खारहे बाबुराव‌ शेडमाके ने पाणी पीने वाले लोटे से इंग्रेजी सेना पर‌ प्रहार कीया जिस से कयी इंग्रेज सैनीक घायल‌हुवे‌ तो‌ वही एक इंग्रेजी सेनीक की जगह परही मौत हो गयी. #vidarbhmazanews24


इतीहास कारोका ये भी माणा है की बाबुराव‌ शेडमाके ने एक बार ताडोबा के जंगल में टहलते वक्त भुख के मारे ऊन्होने बांस का फल जिसे ताडवा कहते है उस ताडवा‌के फल को प्राशन कर लिया यह फल खाते ही बाबुराव‌ शेडमाके बेहोश होकर वही ताडोबा के जंगल में गिर गये, जब बाबुराव‌ शेडमाके को होश आया तब वे मीलो दूर चलने के बाद‌भी थकावट नही होथी थी, शरीर‌ पर घाव लगने पर भी उन्हे घाव‌का अहेसास नही होता था..मानो उनका शरीर वज्रदेही हो गया था... #vidarbhmazanews24

कहते है जब इंग्रेजोने वीर बाबुराव‌ शेडमाके को फांसी पर लटकाया तो उनकी गरदन‌ पथर‌ जैसी मजबुत हो चुकी थी जीससे फासी का फंदा तुट गया, दुसरी बार फीर उन्हे फासी पर लटकाया गया तब फीर फंदा‌ तुट गया, तब उनकी मौत की पृष्टी करणे हेतु इंग्रेजी‌ सेना पास जाने से भी डर लही थी तब क्रिफ्टन के कहने पर बाबुराव‌ शेडमाके इनका शरीर खोलती चुना‌ भट्टी में फेक दीया गया था... #vidarbhmazanews24


उमर के 21 वे साल‌ अपने मात्रु भुमी के लिए अपनी जान नौछावर करणे वाले, हसते हसते फांसी के तख्त पर चड जाने वाले विर बाबुराव‌ शेडमाके इनके जयंती दिवस पर उनकी पावन‌ स्मुर्ती को शत् शत् नमन.... #vidarbhmazanews24

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