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सरकार द्वारा कोल इंडिया पर कोयला देणे का दबाव बनाया जा रहा है - शिवकुमार यादव

सरकार द्वारा कोल इंडिया पर कोयला देणे का दबाव बनाया जा रहा है - शिवकुमार यादव 



विदर्भ माझा न्युज 24 - नागपूर



कोल इंडिया देशभर की थर्मल पावर प्रोजेक्ट्स को बिजली बनाने के लिये सरकारी दर पर यानी 1100-1200 रुपये प्रति टन के हिसाब से कोयला देती है लेकिन यही बिजली कंपनिया वेकोलि को औद्योगिक रैट पर 11 रुपये प्रति यूनिट के दर से बिजली देती है जो की आर्थिक समीकरण के हिसाब से बिल्कुल गलत है - शिवकुमार यादव 



 शिवकुमार यादव,कोयला श्रमिक सभा (एच एम एस )के अध्यक्ष सह जे बी सी सी आई सदस्य एवं वेकोलि संचालन समिति सदस्य तथा केंद्रीय सलाहकार श्रम ठेका मंडल सदस्य (भारत सरकार )ने कोल इंडिया अध्यक्ष प्रमोद अग्रवाल की अध्यक्षता मे हुई वेकोलि संचालन समिति की बैठक में  शिवकुमार यादव ने अपने विचार रखे कहा की कोल इंडिया देशभर की थर्मल पावर प्रोजेक्ट्स को बिजली बनाने के लिये सरकारी दर पर यानि 1100-1200 रुपये प्रति टन के हिसाब से कोयला देती है लेकिन यही बिजली कंपनिया वेकोलि को औद्योगिक रैट पर 11 रुपये प्रति यूनिट के दर से बिजली देती है जो की आर्थिक समीकरण के हिसाब से बिल्कुल गलत है उन्होंने अध्यक्ष कोल इंडिया से निवेदन किया कि वे कोल इंडिया की ओर से कोयला मंत्रालय के माध्यम से ऊर्जा मंत्रालय को 3 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली देने की मांग का प्रस्ताव भेजें ताकि वेकोलि की भी आर्थिक स्थिति अच्छी बनी रहे। बैठक मे वेकोलि के चेयरमैन मनोज कुमार एवं सभी डायरेक्टर्स तथा संघठन के अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित थे। शिवकुमार यादव ने कहा कि पहले सरकारें विदेश से बिजली सयन्त्रों के लिये कोयला आयात करती थी लेकिन जब विदेशो मे कोयले की कीमत बढ़ गयी तो सरकार व्दारा कोल इंडिया पर कोयला देने का दबाव बनाया जा रहा है। बर्ष 2015 के बाद से केंद्र सरकार ने शक्ति योजना शुरु की और उसके तहत निजी बिजली सयन्त्रों को भी सरकारी दर पर कोयला देने का आदेश जारी कर दिया सरकार ने, आज अदानी, अम्बानी, टाटा और सभी निजी सयन्त्रों को भी 1100-1200 रुपये (सरकारी दर )प्रति टन की दर से कोयला कोल इंडिया दे रही है तो इन कंपनीयों से ही कोल इंडिया को 3 रुपये प्रति यूनिट के दर पर बिजली दिला दे येसा शिवकुमार यादव ने वेकोलि संचालन समिति की बैठक में कहा । इस बात को लेकर

कोयला मजदूरों मे शिवकुमार यादव को काफी समर्थन मिल रहा है।

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