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आदिवासी इसे पेन (देव) रूपी मानते है क्योंकि यह उनके पूर्वजो दवारा बनाया गया है.

आदिवासी इसे पेन (देव) रूपी मानते है क्योंकि यह उनके पूर्वजो दवारा बनाया गया है.


 रॉक पेंटिंग/शैल चित्रकला/नतूर हत्ता

   



(विदर्भ माझा न्युज 24) छत्तीसगढ़ :-

   हम कभी मानव उत्पत्ति या मानव सभ्यता के बारे में पढ़ते है तो अक्सर वह कोई न कोई जल श्रोत के आस-पास देखने को मिलता है | उसी तरह ये भी मानव सभ्यता से जोड़ी एक ऐतहासिक जगह है जिसे "चितवा डोंगरी" के नाम से जाना जाता है, जो की छत्तीसगढ़ ग्राम-बोईरडीह ,डोंडी-लोहरा छेत्र में पड़ता है


| ये पहाड़/डोंगरी/टापू , चारो तरफ से एक बहुत बड़े पानी के श्रोत गोंदली डैम से घिरा हुआ है | वहां के निवासियों का मानना है की ये शैल चित्र हज़ारो साल पूराना है पर अभी इसकी कार्बन डेटिंग नहीं हुई है |

देखा जाए तो रॉक पेंटिंग/शैल चित्र, शिकार करने के तकनीक एवं स्थानीय समुदायों के जीवन जीने के तरीकों का एक ऐतहासिक प्रमाण देती है। वानस्पतिक रंगो या खून से इसे बनाया जाता था |

आज आदिवासी इसे पेन (देव) रूपी मानते है क्योंकि यह उनके पूर्वजो दवारा बनाया गया है यहाँ के नज़ारे भी बहुत खूबसूरत है | आदिवासियों की कला-कृति और संस्कृति देखते ही बनती है |

लेखीका :- वर्षा नुरुटी


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