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।। इक खुशी की चाहत में..... ज़िन्दगी में कितने सारे हैं ग़म।

  ।। इक खुशी की चाहत में.....
ज़िन्दगी में कितने सारे हैं ग़म।




( विदर्भ माझा न्युज 24 )


।। इक खुशी की चाहत में.....

ज़िन्दगी में कितने सारे हैं ग़म।

उंगलियों पर गिने तो वो भी लगते हैं कम।

हर पल ज़िन्दगी में संघर्ष करते रहता हैं।

हमेशा ज़िन्दगी को कोसते रहता हैं।

वक्त निकल जाएगा वो भी लगने लगेगा कम।

ज़िन्दगी में कितने सारे हैं ग़म।

अपने ज़िन्दगी में चाहता हैं कुछ खुशी के पल।

पता नहीं आने वाला कैसा होगा कल।

दूर से देखो तो हर नज़ारा अच्छा लगता हैं।

चांद को देखो तो वो भी प्यारा लगता हैं।

पर उसमें भी कितने सारे हैं दाग़।

दूर से देखो तो वो भी लगने लगते हैं कम।

ज़िन्दगी में कितने सारे हैं ग़म।

इक खुशी की चाहत में सारी ज़िन्दगी गुजर जाएगी।

जो हसरत हैं खुशी की शायद वो अधूरी रह जाएगी।

हे बंदे तू क्यों ऐसे खयालों में खोया रहता हैं।

जो हैं पास में उसी में तो ज़िन्दगी का बसेरा हैं।

इक खुशी की चाहत में सारी उम्र पड़ जाएगी कम।

"बाबू" ज़िन्दगी में कितने सारे हैं ग़म।

उंगलियों पर गिने तो वो भी लगते हैं कम।

"कवि"✍️ बाबू भंडारी. "हमनवा" बल्लारपुर.....

मो...7350995551.....

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